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जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान कहाँ स्थित है?

 राष्ट्रीय उद्यान खेल भारत का पहला राष्ट्रीय पार्क और उद्यान बागी बाघ के लिए उद्यान के रूप में स्थापित किया गया था। उत्तराखण्ड केनैनीताल के रूप में रामनगर नगर के पास के रूप में जाना जाता है और सामान्य रूप से खतरनाक होगा। [बाघ पर्यावरण] सबसे पहले आने वाला पार्क था। यह एक महान पशुपालक है। रामागंगा की पातली दून में कक्षा में 1318.54क्लास क्लास में बीटा821.9 कक्षा का कैटेगरी का [जिम व्याघ्र व्याघ्र सुरक्षित क्षेत्र] भी है।

पार्क में [तराई क्षेत्र|उप-हिमालयन टेस्ट] में मौसम और मौसम होते हैं। यह एक समग्र रूप से विकसित होता है और इसमें 488 [प्रजातियां] और जीव की विविधता होती है। अन्य िशन

️️कॉर्️कॉर्️️️️️️️️️ करना हाल के दिनों में लोगों की संख्या में असामान्य रूप से वृद्धि हुई है। हैह में, हर मौसम में 70 ,00 से अधिक गेस्ट पार्क में हैं।

कॉर्बेट नेशनल पार्क में 520.8 वर्ग किमी (21.1 वर्ग मील) में पहाड़ी, नदी के बेल्ट, दलदलीय गड्ढे, घास के मैदान और एक बड़ी झील शामिल है। ऊंचाई 1,300 से 4,000  फीट (400 से 1,220 मीटर) तक होती है। यहाँ शीतकालीन रातें ठंडी होती हैं लेकिन दिन धूपदार और गरम होते हैं। यहाँ जुलाई से सितंबर तक बारिश होती है।

घने नम पर्णपाती वन में मुख्य रूप से [साल (वृक्ष)|साल], हल्दु, पीपल, रोहिनी और आम के पेड़ होते हैं। जंगल पार्क का लगभग 73% हिस्सा घेरते हैं, इस क्षेत्र में 10% घास के मैदान होते हैं। यहाँ 110 पेड़ की पप्रजातियाँ, 50 स्तनधारियों की प्रजातियाँ, 580 पक्षी प्रजातियां और 25 सरीसृप प्रजातियां हैं।



स्थिति

दिल्ली से मुरादाबाद - काशीपुर - रामनगर होते हुए कार्बेट नेशनल पार्क की दूरी 290 कि॰मी॰ है। कार्बेट नेशनल पार्क में पर्यटकों के भ्रमण का समय नवम्बर से मई तक होता है। इस मौसम में की ट्रैवल एजेन्सियाँ कार्बेट नेशनल पार्क में सैलानियों को घुमाने का प्रबन्ध करती हैं। कुमाऊँ विकास निगम भी प्रति शुक्रवार के दिल्ली से कार्बेट नेशनल पार्क तक पर्यटकों को ले जाने के लिए संचालित भ्रमणों (कंडकटेड टूर्स) का आयोजन करता है। कुमाऊँ विकास निगम की बसों में अनुभवी गाइड होते हैं जो पशुओं की जानकारी, उनकी आदतों को बताते हुए बातें करते रहते हैं। कॉर्बेट नेशनल पार्क से राजाजी टाइगर रिजर्व में तीन और बाघ लाने का रास्ता साफ, पूर्व में छोड़े गए बाघ और बाघिन ने शिकार करना शुरू कर दिया है और वे अब इस क्षेत्र में अपने प्राकृतिक वास की तरह व्यवहार कर रहे हैं। अब कुछ दिन बाद तीन और बाघ इस क्षेत्र में छोड़े जाएंगे।

पशु

यहाँ पर शेर, हाथी, भालू, बाघ, सुअर, हिरन, चीतल, साँभर, पांडा, काकड़, नीलगाय, घुरल और चीता आदि 'वन्य प्राणी' अधिक संख्या में मिलते हैं। इसी तरह इस वन में अजगर तथा कई प्रकार के साँप भी निवास करते हैं। जहाँ इस वन्य पशु विहार में अनेक प्रकार के भयानक जन्तु पाये जाते हैं, वहाँ इस पार्क में लगभग 600 रंग - बिरंगे पक्षियों की जातियाँ भी दिखाई देती हैं। यह देश एक ऐसा अभयारण है जिसमें वन्य जन्तुओं की अनेक जातियाँ - प्रजातियों के साथ पक्षियों का भी आधिक्य रहता है। आज विश्व का ऐसा कोई कोना नहीं है, जहाँ के पर्यटक इस पार्क को देखने नहीं आते हों।

पार्क

अंग्रेज वन्य जन्तुओं की रक्षा करने के भी शौकीन थे। सन् 1935में रामगंगा के इस अंचल को वन्य पशुओं के रक्षार्थ सुरक्षित किया गया। उस समय के गवर्नर मालकम हेली के नाम पर इस पार्क का नाम 'हेली नेशनल पार्क' रखा गया। स्वतंत्रता मिलने के बाद इस पार्क का नाम 'रामगंगा नेशनल पार्क' रख दिया गया। स्वतंत्रता के बाद विश्व में जिम कार्बेट नाम एक प्रसिद्ध शिकारी के रूप में फैल गया था। जिम कार्बेट जहाँ अचूक निशानेबाज थे वहीं वन्य पशुओं के प्रिय साथी भी थे। कुमाऊँ के कई आदमखोर शेरों को उन्होंने मारकर सैकड़ों लोगों की जानें बचायी थी। हजारों को भय से मुक्त करवाया था। गढ़वाल में भी एक आदमखोर शेर ने कई लोगों की जानें ले ली थी। उस आदमखोर को भी जिम कार्बेट ने ही मारा था। वह आदमखोर गढ़वाल के रुद्र प्रयाग के आस-पास कई लोगों को मार चुका था। जिम कार्बेट ने 'द मैन ईटर ऑफ रुद्र प्रयाग' नाम की पुस्तकें लिखीं।

भारत सरकार ने जब जिम कार्बेट की लोकप्रियता को समझा और यह अनुभव किया कि उनका कार्यक्षेत्र भी यही अंचल था तो सन् 1957 में इस पार्क का नाम 'जिम कार्बेट नेशनल पार्क' रख दिया गया और जिम कार्बेट नेशनल पार्क जाने वाले पर्यटक इसी मार्ग से जाते हैं। नैनीताल से आनेवाले पर्यटक इस संग्रहालय को देखकर ही आगे बढ़ते हैं।

जिम कार्बेट

जिम कार्बेट का पूरा नाम जेम्स एडवर्ड कार्बेट था। इनका जन्म 25 जुलाई 1875 ई. में हुआ था। जिम कार्बेट बचपन से ही बहुत मेहनती और नीडर व्यक्ति थे। उन्होंने कई काम किये। इन्होंने ड्राइवरी, स्टेशन मास्टरी तथा सेना में भी काम किया और अंत में ट्रान्सपोर्ट अधिकारी तक बने परन्तु उन्हें वन्य पशुओं का प्रेम अपनी ओर आकर्षित करता रहा। जब भी उन्हें समय मिलता, वे कुमाऊँ के वनों में घूमने निकल जाते थे। वन्य पशुओं को बहुत प्यार करते। जो वन्य जन्तु मनुष्य का दुश्मन हो जाता - उसे वे मार देते थे।

जिम कार्बेट के पिता 'मैथ्यू एण्ड सन्स' नामक भवन बनाने वाली कम्पनी में हिस्सेदारा थे। गर्मियों में जिम कार्बेट का परिवार अयायरपाटा स्थित 'गुर्नी हाऊस' में रहता था। वे उस मकान में 1945 तक रहे। ठंडियों में कार्बेट परिवार कालढूँगी वाले अपने मकान में आ जाते थे। 1947 में जिम कार्बेट अपनी बहन के साथ केनिया चले गये थे। वे वहीं बस गये थे। केनिया में ही अस्सी वर्ष की अवस्था में उनका देहान्त हो गया।

आज का जिम कार्बेट पार्क

आज यह पार्क इतना समृद्ध है कि इसके अतिथि-गृह में 200 अतिथियों को एक साथ ठहराने की व्यवस्था है। यहाँ आज सुन्दर अतिथि गृह, केबिन और टेन्ट उपलब्ध है। खाने का उत्तम प्रबन्ध भी है। ढिकाल में हर प्रकार की सुविधा है तो मुख्य गेट के अतिथि-गृह में भी पर्याप्त व्यवस्था है।

रामनगर के रेलवे स्टेशन से 12 कि॰मी॰ की दूरी पर 'कार्बेट नेशनल पार्क' का गेट है। रामनगर रेलवे स्टेशन से छोटी गाड़ियों, टैक्सियों और बसों से पार्क तक पहुँचा जा सकता है।

बस सेवाएँ भी उपलब्ध हैं। दिल्ली से ढिकाला तक बस आ-जा सकती है। यहाँ पहुँचने के लिए रामनगर कालागढ़ मार्गों का भी प्रयोग किया जा सकता है। दिल्ली से ढिकाला 297 कि॰मी॰ है। दिल्ली से गाजियाबाद-हापुड़-मुरदाबाद-काशीपुर-रामनगर होते हुए ढिकाला तक का मार्ग है। मोटर की सड़क अत्यन्त सुन्दर है। जिम कॉर्बेट में सफारी के लिए पूरी जानकारी यहाँ पढ़ सकते हैं| 

जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क का इतिहास – Corbett National Park History in Hindi

प्रसिद्ध वन्यजीव संरक्षणवादी और लेखक जिम कॉर्बेट ने 1930 के दौरान इस क्षेत्र की स्थापना में ब्रिटिश सरकार की सहायता की थी। इसके बाद फिर साल 1936 में, इस क्षेत्र के लगभग 300 वर्ग किमी के क्षेत्र को कवर करते हुए हैली नेशनल पार्क नाम का एक वन्यजीव आरक्षित क्षेत्र स्थापित किया गया।

1955-1956 में इस जगह का नाम बदलकर आरक्षित क्षेत्र का नाम जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के रूप में परिवर्तित कर दिय था। इस पार्क का नाम जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क जिम कॉर्बेट को श्रद्धांजलि और वन्य जीवन के संरक्षण के योगदान के लिए रखा गया क्योंकि उन्होंने इस पार्क की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 

साल 1974 में जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क एक प्रतिष्ठित वन्यजीव संरक्षण अभियान द्वारा प्रोजेक्ट टाइगर को लांच करने के रूप में चुन लिया गया। 1991 में अपनी कालागढ़ वन प्रभाग के तहत सोनांडी वन्यजीव अभयारण्य का पूरा क्षेत्र अपनी तत्काल सीमा में जोड़ा गया था। 


जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान में वन्यजीवन-


पहचान: भारत का पहला और सबसे पुराना राष्ट्रीय उद्यान।  

उद्देश्य: भारत में पहला बाघ संरक्षण परियोजना (संरक्षण की दीर्घकालिक परंपरा) 

स्थापना: 1936 (राष्ट्रीय उद्यान के तौर पर)

स्थानः भारत के उत्तराखंड के नैनीतैल और पौड़ी जिला, रामनगर शहर में फैला  

क्षेत्र: 1318.54 वर्ग किमी  

प्रमुख क्षेत्र : 520.8 वर्ग किमी

बफर क्षेत्र : 797.72  वर्ग किमी  

ऊंचाई: समुद्र तल से 385 मी - 1100 मी उपर 

देशांतर: 7805' पू से 7905' पू

आक्षांश: 29025' पू से  29040' उ

सालाना वर्षा : 1400-2800 मिमी

तापमान: सर्दियों में 4° सेल्सि. से गर्मियों में 42°सेल्सि. तक

जलवायु: पूरे वर्ष समशीतोष्ण

सर्वश्रेष्ठ समय : 15 नवंबर से 15th जून